Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
क्वचिद्भ्रमत्सिद्धगणं क्वचिदुद्गर्जदम्बुदम् ।
क्वचिद्विद्याधराधारं यक्षोत्क्षिप्तक्षयं क्वचित् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं तो सिद्धो
का गण घूम रहा है, कहीं पर तो बड़ी-बड़ी भयंकर गर्जना ओं से युक्त मेघमण्डल है, कहीं पर तो
विद्याधरो की वैठक जमी है, कहीं पर यक्षो के द्वारा विशिष्ट स्थान पड़ा है