Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
क्वचिद्भ्रमत्पुरवरं प्रारब्धसमरं क्वचित् ।
क्वचिद्द्र्वज्जलधरं क्वचिदुद्वृत्तयोगिनि ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर सुन्दर
नगरों के नगर ही घूम रहे हैं, कहीं पर युद्ध का ही आरम्भ हो गया है, कहीं पर मेघ ही बरस रहे हैं,
कहीं पर तो रोद्ररूप धारण की हुई योगिनियाँ विद्यमान हैं