Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
क्वचिद्दैत्यपुरोड्डीनसगन्धर्वपुरं क्वचित् ।
क्वचिद्भ्रमद्ग्रहगणं तारकाकुलितं क्वचित् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं -कहीं पर आसन्न दैत्यनगरों
के कारण गन्धर्वयुक्त देवनगर उड़ रहे हैं, कही पर ग्रहमण्डल घूम रहा है, कहीं पर तो वह तारों से
व्याकुल हो रहा है