Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
क्वचित्खे खगसंघृष्टं क्वचित्क्रुद्धमहानिलम् ।
क्वचिदुत्पातवलितं क्वचिन्मण्डलमण्डितम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर तो आकाश में पक्षियों द्वारा आक्रान्त स्थान है, कहीं पर क्रुद्ध
भयंकर झंझावात है, कहीं पर उत्पातयुक्त स्थान है, कहीं पर मेघादि मण्डलो से व्याप्त है