Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
क्वचिदपूर्वभूतौघं नागरावलितं क्वचित् ।
क्वचिदर्करथाक्रान्तं क्वचिदन्यरथोद्धुरम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर अपूर्व चित्रविचित्र भूतो का समूह (पिशाचसंघ) पड़ा है, कहीं पर नगरों के समूह के समूह
पड़े हैं, कहीं पर सूर्य के रथों से आक्रान्त है, कहीं पर तो चन्द्र आदि के रथों के कारण आक्रान्त
बना है