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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

पदार्थजातं शैलादि यथा स्वप्ने पुरादि च । चिदेवैकं परं व्योम तथा जाग्रत्पदार्थभूः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

सबकी चिन्ात्रता स्वप्न में प्रसिद्ध है, इसलिए उसको कष्टान्त बनाकर जाग्रत में भी पदार्थों की चिन्यात्रता सिद्ध करते हैं / जैसे स्वप्न में पर्वत आदि तथा नगर आदि पदार्थ केवल चिदात्मरूप हैं, वैसे ही जाग्रत में भी ये पृथ्वी आदि तथा नगर आदि पदार्थ केवल चिदात्मरूप हैं, परम चिदात्मरूप ही हैं