Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
क्वचिदुत्तालवेतालं गरुडोड्डामरं क्वचित् ।
क्वचित्सप्रलयाम्भोदं क्वचित्सप्रलयानिलम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर भयंकर लम्बे वेताल हैं, कहीं पर
गरुड़ों से भयंकर है, कहीं पर प्रलय लिये मेघ बरस रहे हैं, कहीं पर प्रलय लिये पवन बह रहे
हैं