Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

ततो भूतगणांस्त्यक्त्वा दूराद्दूरतरं गतः । प्राप्तवानहमेकान्तं शून्यमत्यन्तविस्तृतम् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र. यह सब तमाशा देखकर उन भूतगणो को छोड़कर मैं दूरातिदूर एकान्त स्थान में पहुँचा, जो अत्यन्त विस्तृत तथा शून्य था