Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
समस्तभूतागम्यत्वं तत्र संकल्प्य चेतसा ।
अगम्ये सर्वभूतानामहमासं तदा ततः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले तो
भने अपने अन्तःकरण से उसकी समस्त भूतां द्वारा अगम्यता बना ली, फिर सव भूतो की अगम्य
उस कुटिया में मै प्रविष्ट हो गया