Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
घुणक्षुण्णाङ्गपूर्णेन्दुबिम्बोदरमनोहरा ।
कह्लारकुन्दमन्दारपुष्पश्रीकोशशोभिता ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
वह मनोहर तो ऐसी लगती थी मानों पूर्णचन्द्रविम्ब में घुनने
छेद बना दिया हो, उसे कलार, कुन्द ओर मन्दार के फूलों की शोभाओं से सजाया