Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
कल्पिताथ मया तत्र कुटी प्रकटकोटरा ।
नीरन्ध्रकुड्यनिबिडा पद्मकुङ्मलसुन्दरी ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
राघव, उस शून्य प्रदेश में मैंने अपने सत्य संकल्प से एक कुटी का निर्माण किया,
उसकी कोठरि्यो बड़ी ही स्वच्छ बनी थी, छिद्ररहित दीवारों के कारण निबिड तथा कमल की कली
के सदश वह सुन्दर लगती थी