Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 56, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 56, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 56 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
इदं चिन्तितवानस्मि कस्मिंश्चिदमरालये ।
संस्थितो विविधाः पश्यन्भङ्गुरा जागतीर्गतीः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
शान्ति की ओर गमन कर रहा किसी देवता के स्थान मेँ स्थित मैं
जगत् की विलक्षण भगुर गतियो को देखते हुए यह सोचने लगा