Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
परमाकाशकोशान्तरादिसर्गे निरामये ।
पृथ्व्यादेरुपलम्भस्य भवेत्किमिव कारणम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
कारण के अभाव का उपपादन करते हैं /
जब चिदाकाश कोश के भीतर स्थित आदि सृष्टि ही निर्विकार ब्रह्मरूप है तव पृथिवी आदि
की प्राप्ति का कौन-सा कारण हो सकता है ?