Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
मनःषष्ठेन्द्रियातीतं मनःषष्ठेन्द्रियात्मनः ।
साकारस्य निराकारं कथं भवति कारणम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
मन को लेकर छः इन्द्रियो से ज्ञात न
होनेवाला निराकार ब्रह्म मनयुक्त छः इन्द्रियो से ज्ञात होनेवाले साकार जगत् का कारण कैसे हो
सकता है ?