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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

बीजात्कारणतः कार्यमङ्कुरः किल जायते । न बीजमपि यत्रास्ति तत्र स्यादङ्कुरः कुतः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

बीजरूप कारण से अंकुररूप कार्य उत्पन्न होता है, इसमें तो तनिक भी सन्देह नहीं है । फिर जहाँ पर बीजरूप कारण है ही नहीं, वहाँ पर अंकुर कैसे उत्पन्न होगा ?