Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
कारणेन विना कार्य न च नामोपपद्यते ।
कदा क इव खे केन दृष्टो लब्धः स्फुटो द्रुमः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
कारण के बिना कार्य नहीं होता, यह तो सभी को विदित है । आकाश में लहलहा रहे प्रत्यक्ष वृक्ष
का किसने कब अवलोकन या ग्रहण किया है ?