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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

एवं स्थिते कुतः सर्गः कुतो विद्या क चाज्ञता । ब्रह्म शान्तं घनं सर्वं क्वाहंकारादयः स्थिताः ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसा स्थित होने पर कहाँ से सृष्टि, कहाँ से अविद्या, कहाँ अज्ञता और कहाँ अहंकार आदि स्थित हैं सब शान्त चिद्घन ब्रह्म ही स्थित है