Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अहंभावपिशाचोऽयमज्ञानशिशुनामुना ।
अविद्यमान एवान्तः कल्पितस्तेन संस्थितः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस अज्ञानरूपी बालक ने अपने अन्तःकरण में अविद्यमान ही अहंभावरूपी पिशाच की कल्पना कर
रक्खी है, अतः इसीसे यानी एकमात्र अज्ञान के वश से ही यह स्थित है