Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 57, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 57, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 57 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अयं त्वत्र विशेषस्तं शृणु विश्रान्तचेतसः ।
श्रुतेन येनाहंभावपिशाचः शान्तिमेति ते ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
॥ किन्तु इसमें शान्त चित्तवाले ज्ञानी पुरुष के लिए जो यह विशेष
बात है, उसे आप सुनिये, जिसके सुनने से आपका अहंभावरूपी पिशाच शान्त हो जायेगा