Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 58, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 58 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
न वायोरणुरप्यस्ति सर्गैर्निर्विवरो न यः ।
न च क्वचन विद्यन्ते सर्गा ब्रह्मखमेव तत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा वायु का कोई भी परमाणु नहीं है,जो सर्गो सो भरा न हो और वे सर्ग भी वास्तव
में नहीं हैं, किन्तु वे ब्रह्माकाशमात्र ही हैं