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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 58, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 58, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 58 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

न सा महाभूततास्ति सर्गैर्निर्विवरा न या । न च क्वचन विद्यन्ते सर्गा ब्रह्मखमेव तत् ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसे मिले हुए पंचमहाभूत भी नहीं हैं, जो सर्गाँ से परिपूर्ण न हों, किन्तु सर्गाँ से परिपूर्ण हैं और कहीं सर्ग भी नहीं हैं, किन्तु वे केवल चिदाकाश रूप ही हैं