Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
चिन्तयित्वेत्यहं त्यक्तुं देहं पद्मासनस्थितः ।
आसं समाधिमाधातुं पुनरामीलितेक्षणः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस तरह विचारकर पद्मासन में स्थित हुआ और शरीर को छोड़ने के निमित्त समाधि लगाने
के लिए मैंने फिर अपनी आँखें मूँद लीं