Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
देहाकाशमिह स्थाप्य ध्यानेनेह यथास्थितम् ।
चिदाकाशवपुर्व्योम्ना याम्यैक्यं वारिवाम्बुना ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
अभी मैं ध्यान के प्रभाव से यहाँ पर यथास्थित देहाकाश
को यहीं आकाश में छोड़कर चिदाकाशरूपी शरीर धारणकर वैसे अव्याकृत आकाश के साथ
एकरूप बन जाता हूँ, जैसे जलबिन्दु साधारण जल के साथ एकरूप बन जाता है