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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

आकाश एव भूत्वाहमाकाशेनैकतां गतः । आकाशगुणशब्दार्थान्करोम्याकाशकोशके ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

“भँ सबसे पहले उपाधि का परित्यागकर चिदाकाशरूप हो जाऊँ, तदनन्तर चिदाकाश में अध्यस्त अव्याकृत आकाश के साथ एकरूप बन जाऊँ फिर अव्याकृत आकाश के कार्य भूताकाश के गुण शब्दों ओर उनके अर्थो का उसीमें अनुभव करूँ