Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अनेकचित्रजालानि महाभित्तीनि खानि च ।
मनसेवोग्रराज्यानि कृतानि विविधैर्जनैः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, उनके विषय में
क्या वर्णन करूँ, कुछ तो अनेक चित्रों से शोभित, कुछ बड़ी-बड़ी दीवारों से युक्त, कुछ दीवारों से
रहित और कुछ मनुष्यों द्वारा अपने मन से ही उग्र राजों से आक्रान्त बनाई गई थी