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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

जायमानानि नश्यन्ति वर्धमानानि भूरिशः । वर्तमानान्यतीतानि भविष्यन्ति च सर्वशः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

उनमें कुछ तो उत्पन्न हो रही थी, कुछ नष्ट हो रही थी, कुछ तेजी से बढ़ रही थी, कुछ विद्यमान थी, कुछ अतीत थी और बहुत-सी भविष्यकाल के गर्भ में थी