Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
तथा निर्वेदशास्त्राणि निःशास्त्राणि तथैव च ।
कृमिक्रमसमारम्भदेवादिप्राणिमन्ति च ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
सी अर्थ का विस्तार करते हैं /
किन्हीमें विराग पैदा करनेवाले वेदादि शास्त्र थे और किन्हीं में वेदादि शास्त्र नहीं भी थे तथा
किन्हीं में उदुम्बर के कीट के सदृश समारम्भवाले देवता ही प्राणी थे