Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

जात्या तु पारम्पर्येण संकेताचारवन्ति च । तथा नित्यप्रकाशानि ज्वलिताग्निमयानि च ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर कलि का आरम्भ हो जाने के कारण वेदादि शास्त्रों का उच्छेद हो गया था, इसलिए ब्राह्मण आदि जातियाँ अपनी केवल परम्परा से ही कुछ संकेतों से अपना आचरण करती थीं । कुछ निरन्तर प्रकाशमय थे और कुछ प्रज्वलित अग्नियों से पूर्ण थे