Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
तथा जलैकपूर्णानि पवनैकमयानि च ।
स्तब्धानि परमाकाशे वहन्ति च तथानिशम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ सृष्टियाँ केवल जल से ही भरी थीं, कुछ केवल
वायु से ही भरपूर थीं, कुछ परमाकाश में निश्चल थीं, कुछ रात-दिन चलती-फिरती थीं