Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
अब्ध्यर्काकाशमेर्वादि शतैरावलितान्यलम् ।
चिच्चमत्कारखे स्वप्नजालान्याभान्ति चाविलम् ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
चिति के चमत्काररूप आकाश में यानी
चिदाकाश में सैकड़ों समुद्र, सूर्य, आकाश, मेरु आदि पदार्थों से भलीभाँति आक्रान्त सप्तजाल के
सदश रजोगुण एवं तमोगुण से कलुषित होकर वे अनेक जगत् भासित हो रहे हैं