Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
अभिजातस्वभावस्य सर्गारम्भकरस्य च ।
शुद्धचित्तत्त्वबालस्य संकल्पनगराणि खे ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाश में ये सब जगत् सुन्दर स्वभाववाले तथा सृष्टिरूप खिलवाड़
करनेवाले विशुद्ध चितितत्त्वरूप बालक के संकल्पनगर हैं