Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
सुरासुरादिमशका बहुशोदुम्बरद्रुमे ।
फलानि रसपूर्णानि घूर्णमानानि मारुतैः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
परब्रह्मरूपी उदुम्बरवृक्ष के अन्दर असंख्य देव, दानव
आदि तो मच्छर हैं ओर वे ब्रह्माण्ड पवनं से झूम रहे है, भोगादि विचित्र रसो से परिपूर्ण उसके फल
हैं अर्थात् ब्रह्मरूपी उदुम्बरवृक्ष के ब्रह्माण्डरूपी फल के भीतर ये देव, दानव आदिरूप अनेक
मच्छर विद्यमान हैं