Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
चित्संकल्पनभस्येव भासमानानि भूरिशः ।
वासनावातनुन्नानि विलुठन्त्यात्मचेष्टितैः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
चिति के संकल्परूप आकाश में ही ऐसे-ऐसे असंख्य जगत्
भासित हो रहे हैं, वे सबके सब वासनारूपी वायु से उड़ाये जा रहे अपनी चेष्टाओं से विलुण्ठित हो
रहें है । इधर-उधर लुढ़क रहे हैं