Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 57

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 57

संस्कृत श्लोक

नरकस्वर्गपातालबन्धुमित्रमयान्यपि । महारम्भमयान्येव शून्यानि परमार्थतः ॥ ५७ ॥

हिन्दी अर्थ

बान्धव और मित्ररूप बड़े-बड़े समारोहों से आक्रान्त हैं, फिर भी परमार्थदृष्टि से शून्यरूप ही हैं