Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
पुराणवेदसिद्धान्तकल्पनातल्पपालिषु ।
घननिद्राणि सुप्तानि बिभ्रन्ति शवतामिव ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
पुराण, वेद के सिद्धान्तरूप कल्पनाओं
के स्वप्नों में दृढविश्वासरूपी गाढ निद्रा लेकर सोये हुए ये जगत् तत्त्वज्ञान का अत्यन्त ही अभाव
होने के कारण मानों मृतकों का स्वरूप धारण किये हुए हैं