Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 59, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 59, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 59 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अनन्तमिदमाशून्यं पुरो मे निर्मलं नभः ।
इह भूतं प्रयत्नेन प्रेक्ष्यमाणं न दृश्यते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे सामने विद्यमान यह जो निर्मल आकाश है, वह
तो असीम और चारों ओर से शून्यरूप ही है । बड़े यत्न से मैं देख रहा हूँ, तो भी कोई प्राणी
दिखाई नहीं देता