Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
चिरं रसनया चाहमनया नयहीनया ।
गजगोमायुगुप्तेषु दुःखाद्रिष्वलमाहतः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
तथा बहुत दिनों से भक्ष्याभक्ष्य के विचार से हीन इस जिह्ना ने पशुओं में सबसे बलवान् हाथियों
और सबसे बुद्धिमान् सियारों से सुरक्षित दुःखों के पहाड़ों पर मुझे पर्याप्तरूप से घायल कर
रक्खा है