Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
प्रणताः प्रियकारिण्यः प्रह्वभृत्यसमीरिताः ।
वाद्यगेयरवोन्मिश्राः शुभशब्दश्रियः श्रुताः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
तो क्या रुग से लेकर शब्दपर्यन्त सभी विषय तुम्हे दुर्लभ थे, जिसे कि उनके लिए दुम्हें
अनर्थ प्राप्त हुआ / इस रकार नहीं यह कहते हैं /
मुनिवर, आनन्दजनक, नम्र सेवकजनों से प्रेरित, अतएव प्रणतप्राय वाद्य और गाने के शब्दों
से मिली-जुली अनेक शुभ शब्दों की शोभाएँ सुन चुका हूँ