Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
चिरमास्वादिताः स्वादु चमत्कारमनोरमाः ।
प्रह्वकान्ताजनानीताः षड्रसा गुणशालिनः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
विनीत स्त्रियों द्वारा लाये गये,मधुर आदि रसों के
अनेक चमत्कारो से मनोरम, यथायोम्य मिलाने तथा पकाने आदि के चातुर्य के कारण गुणयुक्त
सम्पादित षड्रसों का मेने चिरकाल तक खूब स्वाद चखा है