Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
दुरतिक्रमणीयानि नीहारगहनानि च ।
जनितातङ्कजालानि जङ्गलानीन्द्रियाणि च ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
दुरतिक्रमणीय जाड्य
ओर हिमों से गहन तथा अनेक तरह का आतंक पैदा करनेवाले ये जंगल और इन्द्रियसमुदाय
एक-से हैं