Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
पङ्कजानि सरन्ध्राणि सुदुर्लक्ष्यगुणानि च ।
ग्रन्थिमन्ति जडाङ्गानि मृणालानीन्द्रियाणि च ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
पंक से उत्पन्न तथा पंक के उत्पादक, छिद्रयुक्त, अत्यन्त दुर्लक्ष्य गुण
(वासना और तन्तु) वाले, गाँठों से समन्वित और जड़ अंगोंवाले ये कमलनाल और इन्द्रिय
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