Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
रूक्षाणि रत्नलुब्धानि कल्लोलवलितानि च ।
दुर्ग्रहग्राहघोराणि क्षाराम्बूनीन्द्रियाणि च ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
रुक्ष रत्नलुब्ध, तरगों से युक्त और दुर्ग्रह ग्राहों से भयंकर, लवणसागर
के जल और ये इन्द्रियसमुदाय एक - से हैं (५)