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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

बान्धवोद्वेगदायीनि देहान्तरकराणि च । करुणाक्रन्दकारीणि मरणानीन्द्रियाणि च ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

बान्धवों को उद्वेग पहुँचानेवाले, अन्य शरीर धारण करानेवाले और करुणा से क्रन्दन करानेवाले ये मरण और इन्द्रियसमुदाय समान हैं