Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 6, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 6, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 6 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
अनन्तेषु पदार्थेषु कारणानि घटादिषु ।
संभ्रमाणि सपङ्कानि चक्रकाणीन्द्रियाणि च ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
कारणभूत, भ्रमण और कीचड़ से युक्त ये कुम्हार के चाक ओर इन्द्रियों दोनों समान हैं