Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
बुद्ध्याकाशैकरूपेण व्यापिना बोधरूपिणा ।
तत्रानन्तेन संकल्पमनुभूतमिदं मया ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्तिम साक्षात्कार की जो वृत्ति है, तद्रूप आकाश में
आविर्भाव हो जाने के कारण एकरूप, पूर्णत्मक, अनन्त तथा बोधस्वरूप हुए मेने उक्त समाधि में
यह संकल्पशून्य, अनुभव किया