Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
तत्राहमिव संसारशते भाते मुनीश्वराः ।
दृष्टा वसिष्ठनामानो ब्रह्मपुत्राः सदुत्तमाः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, वासनानुसार अनेक तरह की
भिन्नता को लिये हुए जो संसार मुझे दिखाई दिये, उनमें आकार में मेरे सदृश वसिष्ठ नाम
के बड़े उत्तम-उत्तम ब्रह्मा के पुत्र अनेक मुनीश्वर देखे