Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मन्द्वासप्ततिस्त्रेताः सर्वा एव सराघवाः ।
तत्र दृष्टं कृतशतं द्वापराणां शतं तथा ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
हे ब्रह्मन्. वहाँ मैंने बहत्तर त्रेतायुग
देखे । वे सभी रामावतार से युक्त थे, सैकड़ों सतयुग देखे और सैकड़ों द्वापर देखे