Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
ऋक्षचक्रविहीनानि निष्कालकलनानि च ।
मूकसंकेतसाराणि भूतजालानि कानिचित् ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ जगत् तो
नक्षत्रचक्र से ही रहित है, अतएव कालगति का ही वहाँ पता नहीं लगता। कुछ तो शब्द, श्रोत्र आदि
के अभाव के कारण मूकपुरुषों के सदूश हाथ आदि के संकेतों के बलपर ही अपना सारा व्यवहार
निभाते हैं