Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
अत्यन्ताबुद्धबुद्धानि मोक्षशब्दार्थदृष्टिषु ।
दारुयन्त्रमयाशेषभूतौघानीव कानिचित् ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, कुछ जगत्
निर्विशेष परब्रह्म की दृष्टि हो जाने पर अलीक की तरह ज्ञात होते हैं, कहीं पर चिति का पुथक्ररण
कर देखने पर काष्ठयन्त्रमय (हाथी, घोड़े आदिरूप) सब प्राणी देखे गये हैं