Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 60, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
सा पूर्णचन्द्रवदना पुष्पप्रकरहासिनी ।
यौवनोद्दामवदना पक्ष्मलक्षणशालिनी ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसका मुख तो पूर्णचन्द्र के सदृश था, उसका हास्य फूल के ढेर-से
लुभावना था, यौवन के कारण उसका आनन कुछ उद्दण्ड-सा लगता था, बरौन (पलकों के आगे
के बाल) के उत्तम लक्षणों से (चिह्नों से) उसकी शोभा देखते ही बनती थी